क्रॉप और ट्रिम — दोनों को मत मिलाइए
ट्रिम करने से वीडियो टाइमलाइन के हिसाब से छोटा होता है। क्रॉप करने से फ्रेम के किनारे कटते हैं — वीडियो की लंबाई वही रहती है, बस ज़ूम-इन होकर कम हिस्सा दिखता है। खराब इंट्रो हटाना है तो क्लिप ट्रिम करें; वॉटरमार्क हटाना है या नए आस्पेक्ट रेशियो में ढालना है तो क्रॉप करें।
प्लेटफ़ॉर्म जो रेशियो चाहता है, वही चुनें
YouTube और TV के लिए 16:9, TikTok, Reels और Shorts के लिए 9:16, फ़ीड और प्रोडक्ट ग्रिड के लिए 1:1, प्रेज़ेंटेशन और स्लाइड्स के लिए 4:3 और 3:4। प्लेटफ़ॉर्म के नेटिव रेशियो में क्रॉप करने से वीडियो काली पट्टियों के बिना फुल स्क्रीन भरता है।
EditVideo से ब्राउज़र में ही क्रॉप करें
इस साइट का वीडियो क्रॉपर सब कुछ लोकल करता है: फ़ाइल डालें, रेशियो चुनें — 16:9, 1:1, 9:16, 4:3 या 3:4 — फिर वीडियो को खींचकर जो हिस्सा रखना है उसे फ्रेम करें और डाउनलोड करें। कुछ भी अपलोड नहीं होता।
क्रॉपिंग से क्वालिटी पर क्या असर पड़ता है
क्रॉप करना फ्रेम में ज़ूम करने जैसा है, इसलिए बची हुई तस्वीर ओरिजिनल से कम पिक्सल से बनती है — और एक्सपोर्ट में एक बार री-एनकोड भी होता है। 4K या 1080p सोर्स को फ़ोन स्क्रीन के लिए क्रॉप करें तो फ़र्क नज़र नहीं आता। पहले से धुँधले फुटेज पर बड़ा क्रॉप करने से वह और धुँधला दिखेगा।
आम क्रॉपिंग काम
किनारे से वॉटरमार्क या टाइमस्टैम्प हटाना। लैंडस्केप क्लिप को Shorts के लिए 9:16 वर्टिकल में ढालना। टॉकिंग-हेड शॉट को टाइट करना ताकि बोलने वाला पूरा फ्रेम भरे। हर बार वही तरीका: किनारे काटो, सब्जेक्ट बचाओ।